पंचांग 2 जुलाई 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 जुलाई 2027 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय04:48 (3 जुल॰)
चंद्रास्त17:36
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- वृषभ 04:13 (3 जुल॰) तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 15:23 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 12:06 (3 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 17:26 तक, फिर मृगशीर्ष 14:56 (3 जुल॰) तक
- योग
- गण्ड 23:17 तक, फिर वृद्धि 19:25 (3 जुल॰) तक
- करण
- वणिज 15:23 तक, फिर विष्टि 01:47 (3 जुल॰) तक, फिर शकुनि 12:06 (3 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:04
- राहु काल10:59 – 12:38
- यमगंड15:56 – 17:36
- गुलिक काल07:41 – 09:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:01 – 07:41
- लाभ(शुभ)07:41 – 09:20
- अमृत(शुभ)09:20 – 10:59
- काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:38
- शुभ(शुभ)12:38 – 14:17
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:36
- चर(सामान्य)17:36 – 19:15
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
- काल(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:56
- लाभ(शुभ)21:56 – 23:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:38 (3 जुल॰)
- शुभ(शुभ)00:38 (3 जुल॰) – 01:59 (3 जुल॰)
- अमृत(शुभ)01:59 (3 जुल॰) – 03:20 (3 जुल॰)
- चर(सामान्य)03:20 (3 जुल॰) – 04:41 (3 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:41 (3 जुल॰) – 06:02 (3 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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