पंचांग 20 जुलाई 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 जुलाई 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:08
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय20:26
चंद्रास्त07:20
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 02:21 (21 जुल॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 04:47 (22 जुल॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 17:31 तक, फिर धनिष्ठा 20:34 (21 जुल॰) तक
योग
प्रीति 17:32 तक, फिर आयुष्मान 18:34 (21 जुल॰) तक
करण
तैतिल 13:05 तक, फिर गर 02:21 (21 जुल॰) तक, फिर वणिज 15:35 (21 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल15:57 – 17:35
  • यमगंड09:24 – 11:02
  • गुलिक काल12:40 – 14:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:08 – 07:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:46 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 11:02
  • लाभ(शुभ)11:02 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:19 – 15:57
  • शुभ(शुभ)15:57 – 17:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:13

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:35
  • लाभ(शुभ)20:35 – 21:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • शुभ(शुभ)23:19 – 00:41 (21 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:41 (21 जुल॰) – 02:02 (21 जुल॰)
  • चर(सामान्य)02:02 (21 जुल॰) – 03:24 (21 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (21 जुल॰) – 04:46 (21 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:46 (21 जुल॰) – 06:08 (21 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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