पंचांग 1 अगस्त 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अगस्त 2027 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:12
सूर्यास्त19:09
चंद्रोदय05:50 (2 अग॰)
चंद्रास्त18:20
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 14:48 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:20 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 15:35 (2 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:05 तक, फिर पुष्य 17:09 (2 अग॰) तक
योग
वज्र 22:43 तक, फिर सिद्धि 18:32 (2 अग॰) तक
करण
विष्टि 09:10 तक, फिर शकुनि 19:20 तक, फिर चतुष्पद 05:28 (2 अग॰) तक, फिर नाग 15:35 (2 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल17:32 – 19:09
  • यमगंड12:40 – 14:18
  • गुलिक काल15:55 – 17:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:12 – 07:49
  • चर(सामान्य)07:49 – 09:26
  • लाभ(शुभ)09:26 – 11:03
  • अमृत(शुभ)11:03 – 12:40
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
  • शुभ(शुभ)14:18 – 15:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:55 – 17:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:32 – 19:09

रात

  • शुभ(शुभ)19:09 – 20:32
  • अमृत(शुभ)20:32 – 21:55
  • चर(सामान्य)21:55 – 23:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:41 (2 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:41 (2 अग॰) – 02:03 (2 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:03 (2 अग॰) – 03:26 (2 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (2 अग॰) – 04:49 (2 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:49 (2 अग॰) – 06:12 (2 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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