पंचांग 30 अगस्त 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 अगस्त 2027 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय05:39 (31 अग॰)
चंद्रास्त17:46
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क 01:03 (31 अग॰) तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 02:41 (31 अग॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 23:11 (31 अग॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 01:03 (31 अग॰) तक, फिर मघा 22:20 (31 अग॰) तक
योग
परिघ 01:36 (31 अग॰) तक, फिर शिव 21:36 (31 अग॰) तक
करण
विष्टि 16:27 तक, फिर शकुनि 02:41 (31 अग॰) तक, फिर चतुष्पद 12:55 (31 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
  • राहु काल07:53 – 09:27
  • यमगंड11:01 – 12:35
  • गुलिक काल14:09 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:19 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
  • चर(सामान्य)14:09 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:16
  • अमृत(शुभ)17:16 – 18:50

रात

  • चर(सामान्य)18:50 – 20:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:09
  • लाभ(शुभ)23:09 – 00:35 (31 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:35 (31 अग॰) – 02:01 (31 अग॰)
  • शुभ(शुभ)02:01 (31 अग॰) – 03:27 (31 अग॰)
  • अमृत(शुभ)03:27 (31 अग॰) – 04:53 (31 अग॰)
  • चर(सामान्य)04:53 (31 अग॰) – 06:19 (31 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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