पंचांग 28 सितंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 सितंबर 2027 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:26
चंद्रोदय05:23 (29 सित॰)
चंद्रास्त17:04
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 13:55 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 10:55 (29 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 08:20 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 06:06 (29 सित॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 04:00 (30 सित॰) तक
- योग
- साध्य 07:32 तक, फिर शुभ 03:56 (29 सित॰) तक, फिर शुक्ल 00:26 (30 सित॰) तक
- करण
- वणिज 13:55 तक, फिर विष्टि 00:24 (29 सित॰) तक, फिर शकुनि 10:55 (29 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:49
- राहु काल15:25 – 16:55
- यमगंड09:24 – 10:55
- गुलिक काल12:25 – 13:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:55
- लाभ(शुभ)10:55 – 12:25
- अमृत(शुभ)12:25 – 13:55
- काल(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:25
- शुभ(शुभ)15:25 – 16:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:26
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:26 – 19:55
- लाभ(शुभ)19:55 – 21:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:25 – 22:55
- शुभ(शुभ)22:55 – 00:25 (29 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:25 (29 सित॰) – 01:55 (29 सित॰)
- चर(सामान्य)01:55 (29 सित॰) – 03:24 (29 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (29 सित॰) – 04:54 (29 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (29 सित॰) – 06:24 (29 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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