पंचांग 10 अक्टूबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अक्टूबर 2027 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय15:02
चंद्रास्त02:44 (11 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 02:55 (11 अक्टू॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 11:41 तक, फिर शुक्ल एकादशी 14:09 (11 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 13:25 तक, फिर धनिष्ठा 16:22 (11 अक्टू॰) तक
- योग
- धृति 14:54 तक, फिर शूल 15:45 (11 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 11:41 तक, फिर वणिज 00:57 (11 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 14:09 (11 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
- राहु काल16:47 – 18:16
- यमगंड12:21 – 13:50
- गुलिक काल15:18 – 16:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
- चर(सामान्य)07:55 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
- अमृत(शुभ)10:52 – 12:21
- काल(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
- शुभ(शुभ)13:50 – 15:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:18 – 16:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:16
रात
- शुभ(शुभ)18:16 – 19:47
- अमृत(शुभ)19:47 – 21:18
- चर(सामान्य)21:18 – 22:50
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:21 (11 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:21 (11 अक्टू॰) – 01:53 (11 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:53 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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