पंचांग 24 अक्टूबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 अक्टूबर 2027 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय02:12 (25 अक्टू॰)
चंद्रास्त14:18
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कर्क 17:41 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 07:53 तक, फिर कृष्ण दशमी 05:40 (25 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण एकादशी 03:22 (26 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 17:41 तक, फिर मघा 16:09 (25 अक्टू॰) तक
- योग
- शुभ 17:47 तक, फिर शुक्ल 14:47 (25 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 07:53 तक, फिर वणिज 18:48 तक, फिर विष्टि 05:40 (25 अक्टू॰) तक, फिर बव 16:31 (25 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल16:39 – 18:06
- यमगंड12:18 – 13:45
- गुलिक काल15:12 – 16:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:57
- चर(सामान्य)07:57 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:51
- अमृत(शुभ)10:51 – 12:18
- काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
- शुभ(शुभ)13:45 – 15:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:12 – 16:39
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:39 – 18:06
रात
- शुभ(शुभ)18:06 – 19:39
- अमृत(शुभ)19:39 – 21:12
- चर(सामान्य)21:12 – 22:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:18 (25 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (25 अक्टू॰) – 01:51 (25 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:51 (25 अक्टू॰) – 03:25 (25 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (25 अक्टू॰) – 04:58 (25 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:58 (25 अक्टू॰) – 06:31 (25 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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