पंचांग 1 दिसंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 दिसंबर 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय09:31
चंद्रास्त20:44
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- धनु 06:24 (2 दिस॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 11:39 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 13:44 (2 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 23:45 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 02:30 (3 दिस॰) तक
- योग
- गण्ड 02:41 (2 दिस॰) तक, फिर वृद्धि 03:22 (3 दिस॰) तक
- करण
- गर 11:39 तक, फिर वणिज 00:38 (2 दिस॰) तक, फिर विष्टि 13:44 (2 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:45परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:23 – 13:46
- यमगंड08:13 – 09:36
- गुलिक काल11:00 – 12:23
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:50 – 08:13
- अमृत(शुभ)08:13 – 09:36
- काल(वर्जित (परंपरा))09:36 – 11:00
- शुभ(शुभ)11:00 – 12:23
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:09
- चर(सामान्य)15:09 – 16:33
- लाभ(शुभ)16:33 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
- शुभ(शुभ)19:33 – 21:10
- अमृत(शुभ)21:10 – 22:46
- चर(सामान्य)22:46 – 00:23 (2 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:23 (2 दिस॰) – 02:00 (2 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (2 दिस॰) – 03:37 (2 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:37 (2 दिस॰) – 05:14 (2 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:14 (2 दिस॰) – 06:50 (2 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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