पंचांग 18 दिसंबर 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 दिसंबर 2027 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय23:00
चंद्रास्त10:57
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:58 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 05:36 (19 दिस॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 03:34 (20 दिस॰) तक
नक्षत्र
मघा 03:30 (19 दिस॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 02:07 (20 दिस॰) तक
योग
विष्कम्भ 23:35 तक, फिर प्रीति 20:37 (19 दिस॰) तक
करण
तैतिल 07:58 तक, फिर गर 18:45 तक, फिर वणिज 05:36 (19 दिस॰) तक, फिर विष्टि 16:33 (19 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52
  • राहु काल09:45 – 11:08
  • यमगंड13:53 – 15:16
  • गुलिक काल07:00 – 08:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:00 – 08:22
  • शुभ(शुभ)08:22 – 09:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:45 – 11:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:30
  • चर(सामान्य)12:30 – 13:53
  • लाभ(शुभ)13:53 – 15:16
  • अमृत(शुभ)15:16 – 16:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:01

रात

  • लाभ(शुभ)18:01 – 19:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:16
  • शुभ(शुभ)21:16 – 22:53
  • अमृत(शुभ)22:53 – 00:31 (19 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:31 (19 दिस॰) – 02:08 (19 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:08 (19 दिस॰) – 03:45 (19 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:45 (19 दिस॰) – 05:23 (19 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:23 (19 दिस॰) – 07:00 (19 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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