पंचांग 14 जनवरी 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 जनवरी 2028 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय20:46
चंद्रास्त08:50
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कर्क 13:56 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 23:17 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 20:11 (15 जन॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 13:56 तक, फिर मघा 11:25 (15 जन॰) तक
योग
प्रीति 09:47 तक, फिर आयुष्मान 05:51 (15 जन॰) तक, फिर सौभाग्य 02:10 (16 जन॰) तक
करण
वणिज 12:57 तक, फिर विष्टि 23:17 तक, फिर बव 09:41 (15 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:05
  • राहु काल11:19 – 12:43
  • यमगंड15:30 – 16:53
  • गुलिक काल08:33 – 09:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:09 – 08:33
  • लाभ(शुभ)08:33 – 09:56
  • अमृत(शुभ)09:56 – 11:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:19 – 12:43
  • शुभ(शुभ)12:43 – 14:06
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:06 – 15:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:30 – 16:53
  • चर(सामान्य)16:53 – 18:17

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:17 – 19:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:53 – 21:30
  • लाभ(शुभ)21:30 – 23:06
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:06 – 00:43 (15 जन॰)
  • शुभ(शुभ)00:43 (15 जन॰) – 02:20 (15 जन॰)
  • अमृत(शुभ)02:20 (15 जन॰) – 03:56 (15 जन॰)
  • चर(सामान्य)03:56 (15 जन॰) – 05:33 (15 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:33 (15 जन॰) – 07:09 (15 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें