पंचांग 16 फ़रवरी 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 फ़रवरी 2028 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय00:30 (17 फ़र॰)
चंद्रास्त10:59
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
तुला 06:26 (17 फ़र॰) तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 01:46 (17 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 01:41 (18 फ़र॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 12:26 तक, फिर विशाखा 12:32 (17 फ़र॰) तक
योग
वृद्धि 18:45 तक, फिर ध्रुव 17:18 (17 फ़र॰) तक
करण
विष्टि 14:06 तक, फिर बव 01:46 (17 फ़र॰) तक, फिर बालव 13:37 (17 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:48 – 14:15
  • यमगंड08:28 – 09:55
  • गुलिक काल11:22 – 12:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:02 – 08:28
  • अमृत(शुभ)08:28 – 09:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:22
  • शुभ(शुभ)11:22 – 12:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • चर(सामान्य)15:42 – 17:08
  • लाभ(शुभ)17:08 – 18:35

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:08
  • शुभ(शुभ)20:08 – 21:41
  • अमृत(शुभ)21:41 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:48 (17 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (17 फ़र॰) – 02:21 (17 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (17 फ़र॰) – 03:55 (17 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:55 (17 फ़र॰) – 05:28 (17 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:28 (17 फ़र॰) – 07:01 (17 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें