पंचांग 20 मार्च 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 मार्च 2028 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:38
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय03:28 (21 मार्च)
चंद्रास्त14:06
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
धनु 08:51 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 21:36 तक, फिर कृष्ण एकादशी 00:14 (22 मार्च) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 05:04 (21 मार्च) तक, फिर श्रवण 08:12 (22 मार्च) तक
योग
परिघ 22:55 तक, फिर शिव 23:54 (21 मार्च) तक
करण
वणिज 08:24 तक, फिर विष्टि 21:36 तक, फिर बव 10:53 (21 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:06
  • राहु काल08:09 – 09:40
  • यमगंड11:11 – 12:42
  • गुलिक काल14:12 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:38 – 08:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:09 – 09:40
  • शुभ(शुभ)09:40 – 11:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:12
  • चर(सामान्य)14:12 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:14
  • अमृत(शुभ)17:14 – 18:45

रात

  • चर(सामान्य)18:45 – 20:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
  • लाभ(शुभ)23:12 – 00:41 (21 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:41 (21 मार्च) – 02:10 (21 मार्च)
  • शुभ(शुभ)02:10 (21 मार्च) – 03:39 (21 मार्च)
  • अमृत(शुभ)03:39 (21 मार्च) – 05:08 (21 मार्च)
  • चर(सामान्य)05:08 (21 मार्च) – 06:37 (21 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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