पंचांग 1 अप्रैल 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अप्रैल 2028 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय10:42
चंद्रास्त00:28 (2 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृषभ 14:25 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 14:14 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 13:22 (2 अप्रैल) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 02:23 (2 अप्रैल) तक, फिर आर्द्रा 01:57 (3 अप्रैल) तक
योग
सौभाग्य 23:30 तक, फिर शोभन 21:32 (2 अप्रैल) तक
करण
तैतिल 14:14 तक, फिर गर 01:52 (2 अप्रैल) तक, फिर वणिज 13:22 (2 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
  • राहु काल09:33 – 11:05
  • यमगंड14:10 – 15:43
  • गुलिक काल06:28 – 08:01

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:28 – 08:01
  • शुभ(शुभ)08:01 – 09:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:33 – 11:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:05 – 12:38
  • चर(सामान्य)12:38 – 14:10
  • लाभ(शुभ)14:10 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:48

रात

  • लाभ(शुभ)18:48 – 20:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:10
  • अमृत(शुभ)23:10 – 00:38 (2 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:38 (2 अप्रैल) – 02:05 (2 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:05 (2 अप्रैल) – 03:32 (2 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:32 (2 अप्रैल) – 05:00 (2 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)05:00 (2 अप्रैल) – 06:27 (2 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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