पंचांग 6 अप्रैल 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 अप्रैल 2028 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय15:49
चंद्रास्त04:27 (7 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 01:52 (7 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 22:33 (7 अप्रैल) तक
नक्षत्र
मघा 19:27 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 16:58 (7 अप्रैल) तक
योग
शूल 09:44 तक, फिर गण्ड 06:00 (7 अप्रैल) तक, फिर वृद्धि 02:08 (8 अप्रैल) तक
करण
बव 15:27 तक, फिर बालव 01:52 (7 अप्रैल) तक, फिर कौलव 12:14 (7 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:01
  • राहु काल14:10 – 15:43
  • यमगंड06:24 – 07:57
  • गुलिक काल09:30 – 11:03

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:24 – 07:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:30 – 11:03
  • चर(सामान्य)11:03 – 12:37
  • लाभ(शुभ)12:37 – 14:10
  • अमृत(शुभ)14:10 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
  • शुभ(शुभ)17:16 – 18:49

रात

  • अमृत(शुभ)18:49 – 20:16
  • चर(सामान्य)20:16 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:36 (7 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)00:36 (7 अप्रैल) – 02:03 (7 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (7 अप्रैल) – 03:30 (7 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)03:30 (7 अप्रैल) – 04:56 (7 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)04:56 (7 अप्रैल) – 06:23 (7 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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