पंचांग 8 अप्रैल 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 अप्रैल 2028 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय17:51
चंद्रास्त05:52 (9 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 19:11 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 15:56 (9 अप्रैल) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 14:22 तक, फिर हस्त 11:52 (9 अप्रैल) तक
योग
ध्रुव 22:14 तक, फिर व्याघात 18:27 (9 अप्रैल) तक
करण
गर 08:52 तक, फिर वणिज 19:11 तक, फिर विष्टि 05:32 (9 अप्रैल) तक, फिर बव 15:56 (9 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
  • राहु काल09:29 – 11:03
  • यमगंड14:09 – 15:43
  • गुलिक काल06:22 – 07:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:56
  • शुभ(शुभ)07:56 – 09:29
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:29 – 11:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:36
  • चर(सामान्य)12:36 – 14:09
  • लाभ(शुभ)14:09 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:49

रात

  • लाभ(शुभ)18:49 – 20:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
  • शुभ(शुभ)21:42 – 23:09
  • अमृत(शुभ)23:09 – 00:36 (9 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:36 (9 अप्रैल) – 02:02 (9 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:02 (9 अप्रैल) – 03:29 (9 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:29 (9 अप्रैल) – 04:55 (9 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)04:55 (9 अप्रैल) – 06:22 (9 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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