पंचांग 19 अगस्त 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 अगस्त 2028 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय05:55 (20 अग॰)
चंद्रास्त18:04
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 19:47 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:13 (20 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 13:02 तक, फिर आश्लेषा 10:23 (20 अग॰) तक
- योग
- व्यतीपात 09:07 तक, फिर वरीयान 05:14 (20 अग॰) तक, फिर परिघ 01:07 (21 अग॰) तक
- करण
- विष्टि 09:27 तक, फिर शकुनि 19:47 तक, फिर चतुष्पद 06:02 (20 अग॰) तक, फिर नाग 16:13 (20 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
- राहु काल09:27 – 11:02
- यमगंड14:13 – 15:48
- गुलिक काल06:17 – 07:52
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
- शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:37
- चर(सामान्य)12:37 – 14:13
- लाभ(शुभ)14:13 – 15:48
- अमृत(शुभ)15:48 – 17:23
- काल(वर्जित (परंपरा))17:23 – 18:58
रात
- लाभ(शुभ)18:58 – 20:23
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:23 – 21:48
- शुभ(शुभ)21:48 – 23:13
- अमृत(शुभ)23:13 – 00:38 (20 अग॰)
- चर(सामान्य)00:38 (20 अग॰) – 02:02 (20 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:02 (20 अग॰) – 03:27 (20 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (20 अग॰) – 04:52 (20 अग॰)
- लाभ(शुभ)04:52 (20 अग॰) – 06:17 (20 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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