पंचांग 20 सितंबर 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 सितंबर 2028 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय07:45
चंद्रास्त19:36
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या 19:55 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 16:19 तक, फिर शुक्ल तृतीया 13:00 (21 सित॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 09:18 तक, फिर चित्रा 06:38 (21 सित॰) तक
- योग
- ब्रह्म 19:05 तक, फिर इन्द्र 15:18 (21 सित॰) तक
- करण
- कौलव 16:19 तक, फिर तैतिल 02:36 (21 सित॰) तक, फिर गर 13:00 (21 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:27 – 13:58
- यमगंड07:54 – 09:25
- गुलिक काल10:56 – 12:27
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:23 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:58 – 15:30
- चर(सामान्य)15:30 – 17:01
- लाभ(शुभ)17:01 – 18:32
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:32 – 20:01
- शुभ(शुभ)20:01 – 21:30
- अमृत(शुभ)21:30 – 22:58
- चर(सामान्य)22:58 – 00:27 (21 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:27 (21 सित॰) – 01:56 (21 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (21 सित॰) – 03:25 (21 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (21 सित॰) – 04:54 (21 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (21 सित॰) – 06:23 (21 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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