पंचांग 24 सितंबर 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 सितंबर 2028 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय11:56
चंद्रास्त23:07
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 02:25 (25 सित॰) तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी 06:57 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 06:33 (25 सित॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 02:25 (25 सित॰) तक, फिर मूल 03:21 (26 सित॰) तक
- योग
- प्रीति 07:08 तक, फिर आयुष्मान 05:44 (25 सित॰) तक, फिर सौभाग्य 04:58 (26 सित॰) तक
- करण
- तैतिल 06:57 तक, फिर गर 18:38 तक, फिर वणिज 06:33 (25 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:50
- राहु काल16:58 – 18:28
- यमगंड12:26 – 13:56
- गुलिक काल15:27 – 16:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
- चर(सामान्य)07:54 – 09:25
- लाभ(शुभ)09:25 – 10:55
- अमृत(शुभ)10:55 – 12:26
- काल(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:56
- शुभ(शुभ)13:56 – 15:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:58 – 18:28
रात
- शुभ(शुभ)18:28 – 19:58
- अमृत(शुभ)19:58 – 21:27
- चर(सामान्य)21:27 – 22:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:57 – 00:26 (25 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:26 (25 सित॰) – 01:55 (25 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:55 (25 सित॰) – 03:25 (25 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (25 सित॰) – 04:54 (25 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (25 सित॰) – 06:24 (25 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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