पंचांग 31 जनवरी 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 जनवरी 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय19:44
चंद्रास्त07:42
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- कर्क 10:01 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 08:49 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 05:50 (1 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 02:45 (2 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 10:01 तक, फिर मघा 07:45 (1 फ़र॰) तक
- योग
- सौभाग्य 19:13 तक, फिर शोभन 15:30 (1 फ़र॰) तक
- करण
- कौलव 08:49 तक, फिर तैतिल 19:20 तक, फिर गर 05:50 (1 फ़र॰) तक, फिर वणिज 16:17 (1 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:10परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:13
- यमगंड08:33 – 09:58
- गुलिक काल11:23 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:08 – 08:33
- अमृत(शुभ)08:33 – 09:58
- काल(वर्जित (परंपरा))09:58 – 11:23
- शुभ(शुभ)11:23 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:37
- चर(सामान्य)15:37 – 17:02
- लाभ(शुभ)17:02 – 18:27
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:27 – 20:02
- शुभ(शुभ)20:02 – 21:37
- अमृत(शुभ)21:37 – 23:12
- चर(सामान्य)23:12 – 00:47 (1 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (1 फ़र॰) – 02:22 (1 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (1 फ़र॰) – 03:57 (1 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (1 फ़र॰) – 05:32 (1 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:32 (1 फ़र॰) – 07:07 (1 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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