पंचांग 14 फ़रवरी 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 फ़रवरी 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय07:19
चंद्रास्त19:24
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 17:49 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 19:55 (15 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 06:05 (15 फ़र॰) तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 08:47 (16 फ़र॰) तक
- योग
- परिघ 13:34 तक, फिर शिव 14:03 (15 फ़र॰) तक
- करण
- बव 17:49 तक, फिर बालव 06:50 (15 फ़र॰) तक, फिर कौलव 19:55 (15 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:15
- यमगंड08:29 – 09:55
- गुलिक काल11:22 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:02 – 08:29
- अमृत(शुभ)08:29 – 09:55
- काल(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:22
- शुभ(शुभ)11:22 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
- चर(सामान्य)15:41 – 17:08
- लाभ(शुभ)17:08 – 18:34
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:34 – 20:08
- शुभ(शुभ)20:08 – 21:41
- अमृत(शुभ)21:41 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:48 (15 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (15 फ़र॰) – 02:21 (15 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (15 फ़र॰) – 03:55 (15 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:55 (15 फ़र॰) – 05:28 (15 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:28 (15 फ़र॰) – 07:02 (15 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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