पंचांग 14 अप्रैल 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 अप्रैल 2029 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त19:18
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 05:33 (15 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 07:47 (16 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 06:07 (15 अप्रैल) तक, फिर भरणी 08:53 (16 अप्रैल) तक
- योग
- विष्कम्भ 04:08 (15 अप्रैल) तक, फिर प्रीति 04:53 (16 अप्रैल) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 16:22 तक, फिर बव 05:33 (15 अप्रैल) तक, फिर बालव 18:41 (15 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 13:00
- राहु काल09:26 – 11:00
- यमगंड14:09 – 15:43
- गुलिक काल06:18 – 07:52
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:18 – 07:52
- शुभ(शुभ)07:52 – 09:26
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:34
- चर(सामान्य)12:34 – 14:09
- लाभ(शुभ)14:09 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:17
- काल(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:51
रात
- लाभ(शुभ)18:51 – 20:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
- शुभ(शुभ)21:42 – 23:08
- अमृत(शुभ)23:08 – 00:34 (15 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:34 (15 अप्रैल) – 02:00 (15 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:00 (15 अप्रैल) – 03:26 (15 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:26 (15 अप्रैल) – 04:51 (15 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:51 (15 अप्रैल) – 06:17 (15 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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