पंचांग 4 जुलाई 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 जुलाई 2029 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय00:46 (5 जुल॰)
चंद्रास्त13:01
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मीन 00:04 (5 जुल॰) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 12:37 तक, फिर कृष्ण नवमी 14:58 (5 जुल॰) तक
नक्षत्र
रेवती 00:04 (5 जुल॰) तक, फिर अश्विनी 02:58 (6 जुल॰) तक
योग
अतिगण्ड 02:20 (5 जुल॰) तक, फिर सुकर्मा 03:14 (6 जुल॰) तक
करण
कौलव 12:37 तक, फिर तैतिल 01:47 (5 जुल॰) तक, फिर गर 14:58 (5 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:18
  • यमगंड07:41 – 09:20
  • गुलिक काल10:59 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:02 – 07:41
  • अमृत(शुभ)07:41 – 09:20
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:59
  • शुभ(शुभ)10:59 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • चर(सामान्य)15:57 – 17:36
  • लाभ(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • शुभ(शुभ)20:36 – 21:57
  • अमृत(शुभ)21:57 – 23:18
  • चर(सामान्य)23:18 – 00:39 (5 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (5 जुल॰) – 02:00 (5 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (5 जुल॰) – 03:21 (5 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:21 (5 जुल॰) – 04:42 (5 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:42 (5 जुल॰) – 06:02 (5 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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