पंचांग 19 जुलाई 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 जुलाई 2029 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:07
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय13:21
चंद्रास्त00:53 (20 जुल॰)
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 06:35 तक, फिर शुक्ल नवमी 04:20 (20 जुल॰) तक, फिर शुक्ल दशमी 02:13 (21 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 02:12 (20 जुल॰) तक, फिर विशाखा 00:51 (21 जुल॰) तक
- योग
- साध्य 02:27 (20 जुल॰) तक, फिर शुभ 23:39 (20 जुल॰) तक
- करण
- बव 06:35 तक, फिर बालव 17:27 तक, फिर कौलव 04:20 (20 जुल॰) तक, फिर तैतिल 15:16 (20 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
- राहु काल14:19 – 15:57
- यमगंड06:07 – 07:46
- गुलिक काल09:24 – 11:02
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:07 – 07:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:46 – 09:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 11:02
- चर(सामान्य)11:02 – 12:40
- लाभ(शुभ)12:40 – 14:19
- अमृत(शुभ)14:19 – 15:57
- काल(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:35
- शुभ(शुभ)17:35 – 19:13
रात
- अमृत(शुभ)19:13 – 20:35
- चर(सामान्य)20:35 – 21:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
- काल(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (20 जुल॰)
- लाभ(शुभ)00:40 (20 जुल॰) – 02:02 (20 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:02 (20 जुल॰) – 03:24 (20 जुल॰)
- शुभ(शुभ)03:24 (20 जुल॰) – 04:46 (20 जुल॰)
- अमृत(शुभ)04:46 (20 जुल॰) – 06:08 (20 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें