पंचांग 1 अगस्त 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 अगस्त 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:12
सूर्यास्त19:09
चंद्रोदय23:21
चंद्रास्त11:43
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- मीन 08:03 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 03:34 (2 अग॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 05:54 (3 अग॰) तक
- नक्षत्र
- रेवती 08:03 तक, फिर अश्विनी 11:00 (2 अग॰) तक
- योग
- धृति 11:24 तक, फिर शूल 12:21 (2 अग॰) तक
- करण
- विष्टि 14:22 तक, फिर बव 03:34 (2 अग॰) तक, फिर बालव 16:45 (2 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:17
- यमगंड07:49 – 09:26
- गुलिक काल11:03 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:12 – 07:49
- अमृत(शुभ)07:49 – 09:26
- काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:55
- चर(सामान्य)15:55 – 17:32
- लाभ(शुभ)17:32 – 19:09
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:09 – 20:32
- शुभ(शुभ)20:32 – 21:55
- अमृत(शुभ)21:55 – 23:18
- चर(सामान्य)23:18 – 00:40 (2 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (2 अग॰) – 02:03 (2 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (2 अग॰) – 03:26 (2 अग॰)
- लाभ(शुभ)03:26 (2 अग॰) – 04:49 (2 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:49 (2 अग॰) – 06:12 (2 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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