पंचांग 8 अगस्त 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 अगस्त 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय05:17 (9 अग॰)
चंद्रास्त17:42
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- मिथुन 14:30 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 10:20 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 09:10 (9 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 20:26 तक, फिर पुष्य 19:44 (9 अग॰) तक
- योग
- वज्र 11:26 तक, फिर सिद्धि 09:27 (9 अग॰) तक
- करण
- वणिज 10:20 तक, फिर विष्टि 21:50 तक, फिर शकुनि 09:10 (9 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:16
- यमगंड07:50 – 09:27
- गुलिक काल11:03 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:14 – 07:50
- अमृत(शुभ)07:50 – 09:27
- काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:16
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:52
- चर(सामान्य)15:52 – 17:29
- लाभ(शुभ)17:29 – 19:05
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:05 – 20:29
- शुभ(शुभ)20:29 – 21:53
- अमृत(शुभ)21:53 – 23:16
- चर(सामान्य)23:16 – 00:40 (9 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (9 अग॰) – 02:03 (9 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (9 अग॰) – 03:27 (9 अग॰)
- लाभ(शुभ)03:27 (9 अग॰) – 04:51 (9 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (9 अग॰) – 06:14 (9 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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