पंचांग 19 सितंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 सितंबर 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय16:20
चंद्रास्त04:13 (20 सित॰)
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 00:30 (20 सित॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वादशी 17:59 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 18:57 (20 सित॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 11:48 तक, फिर धनिष्ठा 13:18 (20 सित॰) तक
- योग
- सुकर्मा 01:22 (20 सित॰) तक, फिर धृति 01:11 (21 सित॰) तक
- करण
- बालव 17:59 तक, फिर कौलव 06:25 (20 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:28 – 13:59
- यमगंड07:54 – 09:25
- गुलिक काल10:56 – 12:28
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:22 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:28
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:28 – 13:59
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:30
- चर(सामान्य)15:30 – 17:02
- लाभ(शुभ)17:02 – 18:33
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:33 – 20:02
- शुभ(शुभ)20:02 – 21:30
- अमृत(शुभ)21:30 – 22:59
- चर(सामान्य)22:59 – 00:28 (20 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:28 (20 सित॰) – 01:56 (20 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (20 सित॰) – 03:25 (20 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (20 सित॰) – 04:54 (20 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (20 सित॰) – 06:23 (20 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें