पंचांग 25 सितंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 सितंबर 2029 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय19:57
चंद्रास्त08:19
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 04:45 (26 सित॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 07:20 (27 सित॰) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 01:36 (26 सित॰) तक, फिर भरणी 04:40 (27 सित॰) तक
- योग
- व्याघात 03:55 (26 सित॰) तक, फिर हर्षण 04:56 (27 सित॰) तक
- करण
- वणिज 15:29 तक, फिर विष्टि 04:45 (26 सित॰) तक, फिर बव 18:02 (26 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50
- राहु काल15:27 – 16:57
- यमगंड09:25 – 10:55
- गुलिक काल12:26 – 13:56
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:55
- लाभ(शुभ)10:55 – 12:26
- अमृत(शुभ)12:26 – 13:56
- काल(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:27
- शुभ(शुभ)15:27 – 16:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:28
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:28 – 19:57
- लाभ(शुभ)19:57 – 21:27
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:27 – 22:56
- शुभ(शुभ)22:56 – 00:26 (26 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
- चर(सामान्य)01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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