पंचांग 8 अक्टूबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 अक्टूबर 2029 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय06:44
चंद्रास्त18:34
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या 15:38 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 20:55 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 17:10 (9 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 02:08 (9 अक्टू॰) तक, फिर स्वाती 23:13 (9 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 09:01 तक, फिर वैधृति 04:44 (9 अक्टू॰) तक, फिर विष्कम्भ 00:33 (10 अक्टू॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 10:50 तक, फिर बव 20:55 तक, फिर बालव 07:01 (9 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
- राहु काल07:55 – 09:24
- यमगंड10:53 – 12:21
- गुलिक काल13:50 – 15:19
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:26 – 07:55
- काल(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
- चर(सामान्य)13:50 – 15:19
- लाभ(शुभ)15:19 – 16:48
- अमृत(शुभ)16:48 – 18:17
रात
- चर(सामान्य)18:17 – 19:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:48 – 21:19
- काल(वर्जित (परंपरा))21:19 – 22:50
- लाभ(शुभ)22:50 – 00:22 (9 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:22 (9 अक्टू॰) – 01:53 (9 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:53 (9 अक्टू॰) – 03:24 (9 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (9 अक्टू॰) – 04:55 (9 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:55 (9 अक्टू॰) – 06:26 (9 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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