पंचांग 4 जनवरी 2030
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 जनवरी 2030 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:34
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
- संवत्सर:
- साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- धनु 02:01 (5 जन॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 08:19 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 06:09 (5 जन॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 04:30 (6 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 20:22 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 19:09 (5 जन॰) तक
- योग
- ध्रुव 09:53 तक, फिर व्याघात 06:55 (5 जन॰) तक, फिर हर्षण 04:21 (6 जन॰) तक
- करण
- नाग 08:19 तक, फिर किंस्तुघ्न 19:11 तक, फिर बव 06:09 (5 जन॰) तक, फिर बालव 17:15 (5 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:01
- राहु काल11:16 – 12:39
- यमगंड15:25 – 16:48
- गुलिक काल08:30 – 09:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:07 – 08:30
- लाभ(शुभ)08:30 – 09:53
- अमृत(शुभ)09:53 – 11:16
- काल(वर्जित (परंपरा))11:16 – 12:39
- शुभ(शुभ)12:39 – 14:02
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:25 – 16:48
- चर(सामान्य)16:48 – 18:11
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:11 – 19:48
- काल(वर्जित (परंपरा))19:48 – 21:25
- लाभ(शुभ)21:25 – 23:02
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:02 – 00:39 (5 जन॰)
- शुभ(शुभ)00:39 (5 जन॰) – 02:16 (5 जन॰)
- अमृत(शुभ)02:16 (5 जन॰) – 03:53 (5 जन॰)
- चर(सामान्य)03:53 (5 जन॰) – 05:30 (5 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:30 (5 जन॰) – 07:08 (5 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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