पंचांग 9 जनवरी 2030
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 जनवरी 2030 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय10:41
चंद्रास्त23:10
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कुंभ 14:13 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी 04:40 (10 जन॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 06:29 (11 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 20:39 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 22:45 (10 जन॰) तक
- योग
- वरीयान 23:25 तक, फिर परिघ 23:33 (10 जन॰) तक
- करण
- कौलव 16:00 तक, फिर तैतिल 04:40 (10 जन॰) तक, फिर गर 17:30 (10 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:41 – 14:04
- यमगंड08:32 – 09:55
- गुलिक काल11:18 – 12:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:08 – 08:32
- अमृत(शुभ)08:32 – 09:55
- काल(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:18
- शुभ(शुभ)11:18 – 12:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:04
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:28
- चर(सामान्य)15:28 – 16:51
- लाभ(शुभ)16:51 – 18:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:14 – 19:51
- शुभ(शुभ)19:51 – 21:28
- अमृत(शुभ)21:28 – 23:04
- चर(सामान्य)23:04 – 00:41 (10 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (10 जन॰) – 02:18 (10 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:18 (10 जन॰) – 03:55 (10 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:55 (10 जन॰) – 05:32 (10 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:32 (10 जन॰) – 07:09 (10 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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