पंचांग 3 फ़रवरी 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 फ़रवरी 2030 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय07:18
चंद्रास्त19:14
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
मकर 16:10 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:45 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 20:25 (4 फ़र॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 04:11 (4 फ़र॰) तक, फिर शतभिषा 04:39 (5 फ़र॰) तक
योग
व्यतीपात 10:01 तक, फिर वरीयान 08:20 (4 फ़र॰) तक
करण
किंस्तुघ्न 09:07 तक, फिर बव 20:45 तक, फिर बालव 08:31 (4 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल17:04 – 18:29
  • यमगंड12:48 – 14:13
  • गुलिक काल15:38 – 17:04

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:32
  • चर(सामान्य)08:32 – 09:57
  • लाभ(शुभ)09:57 – 11:23
  • अमृत(शुभ)11:23 – 12:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
  • शुभ(शुभ)14:13 – 15:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:38 – 17:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:04 – 18:29

रात

  • शुभ(शुभ)18:29 – 20:04
  • अमृत(शुभ)20:04 – 21:38
  • चर(सामान्य)21:38 – 23:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:48 (4 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:48 (4 फ़र॰) – 02:22 (4 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)02:22 (4 फ़र॰) – 03:57 (4 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:57 (4 फ़र॰) – 05:32 (4 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)05:32 (4 फ़र॰) – 07:07 (4 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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