पंचांग 22 फ़रवरी 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 फ़रवरी 2030 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय22:44
चंद्रास्त09:33
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कन्या 08:13 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 00:51 (23 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 22:34 (23 फ़र॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 19:23 तक, फिर स्वाती 17:46 (23 फ़र॰) तक
योग
गण्ड 14:38 तक, फिर वृद्धि 11:32 (23 फ़र॰) तक
करण
कौलव 14:02 तक, फिर तैतिल 00:51 (23 फ़र॰) तक, फिर गर 11:41 (23 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11
  • राहु काल11:20 – 12:48
  • यमगंड15:43 – 17:10
  • गुलिक काल08:25 – 09:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:58 – 08:25
  • लाभ(शुभ)08:25 – 09:53
  • अमृत(शुभ)09:53 – 11:20
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:10
  • चर(सामान्य)17:10 – 18:37

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:42
  • लाभ(शुभ)21:42 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:47 (23 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:47 (23 फ़र॰) – 02:20 (23 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:20 (23 फ़र॰) – 03:52 (23 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:52 (23 फ़र॰) – 05:25 (23 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:25 (23 फ़र॰) – 06:57 (23 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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