पंचांग 8 अप्रैल 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 अप्रैल 2030 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय09:55
चंद्रास्त23:26
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृषभ 02:45 (9 अप्रैल) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 15:14 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 17:41 (9 अप्रैल) तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:13 तक, फिर मृगशीर्ष 16:11 (9 अप्रैल) तक
योग
सौभाग्य 00:00 (9 अप्रैल) तक, फिर शोभन 00:48 (10 अप्रैल) तक
करण
बालव 15:14 तक, फिर कौलव 04:30 (9 अप्रैल) तक, फिर तैतिल 17:41 (9 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
  • राहु काल07:56 – 09:29
  • यमगंड11:03 – 12:36
  • गुलिक काल14:09 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:23 – 07:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:56 – 09:29
  • शुभ(शुभ)09:29 – 11:03
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:09
  • चर(सामान्य)14:09 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:16
  • अमृत(शुभ)17:16 – 18:49

रात

  • चर(सामान्य)18:49 – 20:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:09
  • लाभ(शुभ)23:09 – 00:36 (9 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:36 (9 अप्रैल) – 02:02 (9 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)02:02 (9 अप्रैल) – 03:29 (9 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:29 (9 अप्रैल) – 04:55 (9 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:55 (9 अप्रैल) – 06:22 (9 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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