पंचांग 12 सितंबर 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 सितंबर 2030 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय18:48
चंद्रास्त06:31
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कुंभ 12:03 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 02:26 (13 सित॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 02:39 (14 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 18:07 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:49 (13 सित॰) तक
योग
शूल 20:05 तक, फिर गण्ड 19:04 (13 सित॰) तक
करण
बालव 14:32 तक, फिर कौलव 02:26 (13 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:28 (13 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55
  • राहु काल14:02 – 15:35
  • यमगंड06:21 – 07:54
  • गुलिक काल09:26 – 10:58

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:21 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
  • चर(सामान्य)10:58 – 12:30
  • लाभ(शुभ)12:30 – 14:02
  • अमृत(शुभ)14:02 – 15:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:35 – 17:07
  • शुभ(शुभ)17:07 – 18:39

रात

  • अमृत(शुभ)18:39 – 20:07
  • चर(सामान्य)20:07 – 21:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:35 – 23:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:03 – 00:30 (13 सित॰)
  • लाभ(शुभ)00:30 (13 सित॰) – 01:58 (13 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (13 सित॰) – 03:26 (13 सित॰)
  • शुभ(शुभ)03:26 (13 सित॰) – 04:54 (13 सित॰)
  • अमृत(शुभ)04:54 (13 सित॰) – 06:21 (13 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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