पंचांग 1 अक्टूबर 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 अक्टूबर 2030 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय10:09
चंद्रास्त21:36
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 02:55 (2 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 00:33 (3 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 08:21 तक, फिर अनुराधा 06:37 (2 अक्टू॰) तक
योग
प्रीति 23:24 तक, फिर आयुष्मान 20:19 (2 अक्टू॰) तक
करण
बव 16:09 तक, फिर बालव 02:55 (2 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 13:42 (2 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल15:23 – 16:53
  • यमगंड09:24 – 10:54
  • गुलिक काल12:24 – 13:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:54
  • लाभ(शुभ)10:54 – 12:24
  • अमृत(शुभ)12:24 – 13:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
  • शुभ(शुभ)15:23 – 16:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:23

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:23 – 19:53
  • लाभ(शुभ)19:53 – 21:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 22:53
  • शुभ(शुभ)22:53 – 00:24 (2 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:24 (2 अक्टू॰) – 01:54 (2 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:54 (2 अक्टू॰) – 03:24 (2 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (2 अक्टू॰) – 04:54 (2 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (2 अक्टू॰) – 06:25 (2 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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