पंचांग 18 दिसंबर 2030
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 दिसंबर 2030 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:00
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय01:12 (19 दिस॰)
चंद्रास्त12:32
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
- संवत्सर:
- साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 17:20 तक, फिर कृष्ण नवमी 16:27 (19 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 20:24 तक, फिर हस्त 20:02 (19 दिस॰) तक
- योग
- आयुष्मान 16:20 तक, फिर सौभाग्य 14:27 (19 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 17:20 तक, फिर तैतिल 04:59 (19 दिस॰) तक, फिर गर 16:27 (19 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:53परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:31 – 13:53
- यमगंड08:23 – 09:45
- गुलिक काल11:08 – 12:31
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:00 – 08:23
- अमृत(शुभ)08:23 – 09:45
- काल(वर्जित (परंपरा))09:45 – 11:08
- शुभ(शुभ)11:08 – 12:31
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 13:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:16
- चर(सामान्य)15:16 – 16:39
- लाभ(शुभ)16:39 – 18:01
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:01 – 19:39
- शुभ(शुभ)19:39 – 21:16
- अमृत(शुभ)21:16 – 22:53
- चर(सामान्य)22:53 – 00:31 (19 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (19 दिस॰) – 02:08 (19 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:08 (19 दिस॰) – 03:46 (19 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:46 (19 दिस॰) – 05:23 (19 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:23 (19 दिस॰) – 07:00 (19 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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