पंचांग 18 जनवरी 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 जनवरी 2031 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय02:58 (19 जन॰)
चंद्रास्त13:30
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
तुला 18:50 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 01:57 (19 जन॰) तक, फिर कृष्ण एकादशी 23:19 (19 जन॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 00:26 (19 जन॰) तक, फिर अनुराधा 22:31 (19 जन॰) तक
योग
शूल 12:37 तक, फिर गण्ड 09:29 (19 जन॰) तक
करण
वणिज 15:06 तक, फिर विष्टि 01:57 (19 जन॰) तक, फिर बव 12:41 (19 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:07
  • राहु काल09:57 – 11:21
  • यमगंड14:08 – 15:32
  • गुलिक काल07:09 – 08:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • शुभ(शुभ)08:33 – 09:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:44
  • चर(सामान्य)12:44 – 14:08
  • लाभ(शुभ)14:08 – 15:32
  • अमृत(शुभ)15:32 – 16:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:56 – 18:19

रात

  • लाभ(शुभ)18:19 – 19:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:56 – 21:32
  • शुभ(शुभ)21:32 – 23:08
  • अमृत(शुभ)23:08 – 00:44 (19 जन॰)
  • चर(सामान्य)00:44 (19 जन॰) – 02:21 (19 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:21 (19 जन॰) – 03:57 (19 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:57 (19 जन॰) – 05:33 (19 जन॰)
  • लाभ(शुभ)05:33 (19 जन॰) – 07:09 (19 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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