पंचांग 9 मार्च 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 मार्च 2031 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय18:57
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
- संवत्सर:
- साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- सिंह 20:45 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 09:59 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 09:35 (10 मार्च) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 14:40 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 14:49 (10 मार्च) तक
- योग
- धृति 07:21 तक, फिर शूल 05:55 (10 मार्च) तक, फिर गण्ड 04:11 (11 मार्च) तक
- करण
- बव 09:59 तक, फिर बालव 21:50 तक, फिर कौलव 09:35 (10 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:09
- राहु काल17:13 – 18:42
- यमगंड12:45 – 14:14
- गुलिक काल15:43 – 17:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:47 – 08:17
- चर(सामान्य)08:17 – 09:46
- लाभ(शुभ)09:46 – 11:15
- अमृत(शुभ)11:15 – 12:45
- काल(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:14
- शुभ(शुभ)14:14 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:42
रात
- शुभ(शुभ)18:42 – 20:13
- अमृत(शुभ)20:13 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:44 (10 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:44 (10 मार्च) – 02:15 (10 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:15 (10 मार्च) – 03:46 (10 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:46 (10 मार्च) – 05:16 (10 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:16 (10 मार्च) – 06:47 (10 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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