पंचांग 8 मई 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 मई 2031 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:03
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय20:24
चंद्रास्त06:52
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 06:19 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 03:18 (9 मई) तक, फिर कृष्ण तृतीया 00:12 (10 मई) तक
नक्षत्र
अनुराधा 01:25 (9 मई) तक, फिर ज्येष्ठा 23:08 (9 मई) तक
योग
वरीयान 09:29 तक, फिर परिघ 05:54 (9 मई) तक, फिर शिव 02:16 (10 मई) तक
करण
कौलव 06:19 तक, फिर तैतिल 16:49 तक, फिर गर 03:18 (9 मई) तक, फिर वणिज 13:45 (9 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
  • राहु काल14:08 – 15:44
  • यमगंड06:03 – 07:40
  • गुलिक काल09:17 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:03 – 07:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:40 – 09:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:17 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:31
  • लाभ(शुभ)12:31 – 14:08
  • अमृत(शुभ)14:08 – 15:44
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:44 – 17:21
  • शुभ(शुभ)17:21 – 18:58

रात

  • अमृत(शुभ)18:58 – 20:21
  • चर(सामान्य)20:21 – 21:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:44 – 23:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:30 (9 मई)
  • लाभ(शुभ)00:30 (9 मई) – 01:54 (9 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (9 मई) – 03:17 (9 मई)
  • शुभ(शुभ)03:17 (9 मई) – 04:40 (9 मई)
  • अमृत(शुभ)04:40 (9 मई) – 06:03 (9 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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