पंचांग 23 जुलाई 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 जुलाई 2031 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय09:05
चंद्रास्त21:32
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 02:50 (24 जुल॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:52 (25 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 06:58 (24 जुल॰) तक
योग
वरीयान 00:53 (24 जुल॰) तक, फिर परिघ 00:47 (25 जुल॰) तक
करण
वणिज 14:09 तक, फिर विष्टि 02:50 (24 जुल॰) तक, फिर बव 15:25 (24 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:41 – 14:18
  • यमगंड07:47 – 09:25
  • गुलिक काल11:03 – 12:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:09 – 07:47
  • अमृत(शुभ)07:47 – 09:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
  • चर(सामान्य)15:56 – 17:34
  • लाभ(शुभ)17:34 – 19:12

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
  • शुभ(शुभ)20:34 – 21:57
  • अमृत(शुभ)21:57 – 23:19
  • चर(सामान्य)23:19 – 00:41 (24 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (24 जुल॰) – 02:03 (24 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (24 जुल॰) – 03:25 (24 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:25 (24 जुल॰) – 04:47 (24 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:47 (24 जुल॰) – 06:09 (24 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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