पंचांग 6 अक्टूबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 अक्टूबर 2031 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय22:41
चंद्रास्त11:14
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 22:50 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 00:54 (7 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 03:07 (8 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 09:38 तक, फिर मृगशीर्ष 12:08 (7 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 18:38 तक, फिर वरीयान 19:15 (7 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 11:57 तक, फिर वणिज 00:54 (7 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 13:58 (7 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
- राहु काल07:55 – 09:24
- यमगंड10:53 – 12:22
- गुलिक काल13:51 – 15:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:26 – 07:55
- काल(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:51
- चर(सामान्य)13:51 – 15:20
- लाभ(शुभ)15:20 – 16:50
- अमृत(शुभ)16:50 – 18:19
रात
- चर(सामान्य)18:19 – 19:50
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:50 – 21:21
- काल(वर्जित (परंपरा))21:21 – 22:51
- लाभ(शुभ)22:51 – 00:22 (7 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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