पंचांग 3 दिसंबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 दिसंबर 2031 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:51
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय21:44
चंद्रास्त10:03
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 12:28 तक, फिर कृष्ण पंचमी 15:02 (4 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 09:56 तक, फिर पुष्य 12:55 (4 दिस॰) तक
- योग
- शुक्ल 10:17 तक, फिर ब्रह्म 11:08 (4 दिस॰) तक
- करण
- बालव 12:28 तक, फिर कौलव 01:45 (4 दिस॰) तक, फिर तैतिल 15:02 (4 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:46परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:24 – 13:47
- यमगंड08:14 – 09:37
- गुलिक काल11:00 – 12:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:51 – 08:14
- अमृत(शुभ)08:14 – 09:37
- काल(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:00
- शुभ(शुभ)11:00 – 12:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:10
- चर(सामान्य)15:10 – 16:33
- लाभ(शुभ)16:33 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
- शुभ(शुभ)19:33 – 21:10
- अमृत(शुभ)21:10 – 22:47
- चर(सामान्य)22:47 – 00:24 (4 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:24 (4 दिस॰) – 02:01 (4 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (4 दिस॰) – 03:38 (4 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:38 (4 दिस॰) – 05:15 (4 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:15 (4 दिस॰) – 06:52 (4 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें