पंचांग 14 दिसंबर 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 दिसंबर 2031 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:57
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:09
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृश्चिक 18:04 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 14:35 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 11:19 (15 दिस॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 18:04 तक, फिर मूल 15:29 (15 दिस॰) तक
योग
शूल 21:05 तक, फिर गण्ड 17:07 (15 दिस॰) तक
करण
नाग 14:35 तक, फिर किंस्तुघ्न 00:59 (15 दिस॰) तक, फिर बव 11:19 (15 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:51
  • राहु काल16:37 – 17:59
  • यमगंड12:28 – 13:51
  • गुलिक काल15:14 – 16:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:57 – 08:20
  • चर(सामान्य)08:20 – 09:43
  • लाभ(शुभ)09:43 – 11:06
  • अमृत(शुभ)11:06 – 12:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:28 – 13:51
  • शुभ(शुभ)13:51 – 15:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 17:59

रात

  • शुभ(शुभ)17:59 – 19:37
  • अमृत(शुभ)19:37 – 21:14
  • चर(सामान्य)21:14 – 22:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:51 – 00:29 (15 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:29 (15 दिस॰) – 02:06 (15 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:06 (15 दिस॰) – 03:43 (15 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:43 (15 दिस॰) – 05:21 (15 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:21 (15 दिस॰) – 06:58 (15 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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