पंचांग 27 जून 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 जून 2032 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय22:38
चंद्रास्त09:51
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 01:21 (28 जून) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 22:45 (28 जून) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 15:55 तक, फिर शतभिषा 13:59 (28 जून) तक
योग
विष्कम्भ 07:42 तक, फिर प्रीति 04:16 (28 जून) तक, फिर आयुष्मान 01:09 (29 जून) तक
करण
कौलव 14:47 तक, फिर तैतिल 01:21 (28 जून) तक, फिर गर 12:00 (28 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
  • राहु काल17:35 – 19:14
  • यमगंड12:37 – 14:16
  • गुलिक काल15:56 – 17:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:00 – 07:39
  • चर(सामान्य)07:39 – 09:19
  • लाभ(शुभ)09:19 – 10:58
  • अमृत(शुभ)10:58 – 12:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:16
  • शुभ(शुभ)14:16 – 15:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:14

रात

  • शुभ(शुभ)19:14 – 20:35
  • अमृत(शुभ)20:35 – 21:56
  • चर(सामान्य)21:56 – 23:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:37 (28 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (28 जून) – 01:58 (28 जून)
  • लाभ(शुभ)01:58 (28 जून) – 03:19 (28 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:19 (28 जून) – 04:40 (28 जून)
  • शुभ(शुभ)04:40 (28 जून) – 06:00 (28 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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