पंचांग 22 जुलाई 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 जुलाई 2032 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय18:45
चंद्रास्तनहीं
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु 14:30 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 00:21 (23 जुल॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 20:36 (23 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 09:11 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 06:23 (23 जुल॰) तक
योग
विष्कम्भ 01:46 (23 जुल॰) तक, फिर प्रीति 21:35 (23 जुल॰) तक
करण
विष्टि 14:10 तक, फिर बव 00:21 (23 जुल॰) तक, फिर बालव 10:29 (23 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल14:18 – 15:56
  • यमगंड06:09 – 07:47
  • गुलिक काल09:24 – 11:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:09 – 07:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:47 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 11:02
  • चर(सामान्य)11:02 – 12:40
  • लाभ(शुभ)12:40 – 14:18
  • अमृत(शुभ)14:18 – 15:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:34
  • शुभ(शुभ)17:34 – 19:12

रात

  • अमृत(शुभ)19:12 – 20:35
  • चर(सामान्य)20:35 – 21:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:41 (23 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)00:41 (23 जुल॰) – 02:03 (23 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (23 जुल॰) – 03:25 (23 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)03:25 (23 जुल॰) – 04:47 (23 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)04:47 (23 जुल॰) – 06:09 (23 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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