पंचांग 21 अगस्त 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अगस्त 2032 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय19:06
चंद्रास्तनहीं
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 07:16 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 03:21 (22 अग॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 23:37 (22 अग॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 11:03 तक, फिर शतभिषा 07:59 (22 अग॰) तक
योग
अतिगण्ड 00:12 (22 अग॰) तक, फिर सुकर्मा 20:00 (22 अग॰) तक
करण
बव 07:16 तक, फिर बालव 17:18 तक, फिर कौलव 03:21 (22 अग॰) तक, फिर तैतिल 13:27 (22 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
  • राहु काल09:27 – 11:02
  • यमगंड14:12 – 15:47
  • गुलिक काल06:17 – 07:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
  • शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:37
  • चर(सामान्य)12:37 – 14:12
  • लाभ(शुभ)14:12 – 15:47
  • अमृत(शुभ)15:47 – 17:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:22 – 18:57

रात

  • लाभ(शुभ)18:57 – 20:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:22 – 21:47
  • शुभ(शुभ)21:47 – 23:12
  • अमृत(शुभ)23:12 – 00:37 (22 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:52 (22 अग॰) – 06:18 (22 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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