पंचांग 19 नवंबर 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 नवंबर 2032 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:43
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय19:59
चंद्रास्त08:26
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1954 · विक्रम (चैत्रादि) 2089
संवत्सर:
परिधावी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृषभ 15:09 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 09:51 तक, फिर कृष्ण तृतीया 09:35 (20 नव॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 03:19 (20 नव॰) तक, फिर आर्द्रा 04:08 (21 नव॰) तक
योग
सिद्ध 02:31 (20 नव॰) तक, फिर साध्य 01:29 (21 नव॰) तक
करण
गर 09:51 तक, फिर वणिज 21:38 तक, फिर विष्टि 09:35 (20 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:42
  • राहु काल10:55 – 12:19
  • यमगंड15:08 – 16:32
  • गुलिक काल08:07 – 09:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:43 – 08:07
  • लाभ(शुभ)08:07 – 09:31
  • अमृत(शुभ)09:31 – 10:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:19
  • शुभ(शुभ)12:19 – 13:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
  • चर(सामान्य)16:32 – 17:56

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:32 – 21:08
  • लाभ(शुभ)21:08 – 22:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:44 – 00:20 (20 नव॰)
  • शुभ(शुभ)00:20 (20 नव॰) – 01:56 (20 नव॰)
  • अमृत(शुभ)01:56 (20 नव॰) – 03:32 (20 नव॰)
  • चर(सामान्य)03:32 (20 नव॰) – 05:08 (20 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:08 (20 नव॰) – 06:44 (20 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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