पंचांग 22 मार्च 2034
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 मार्च 2034 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:37
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय08:01
चंद्रास्त20:53
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1956 · विक्रम (चैत्रादि) 2091
- संवत्सर:
- आनंद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन 07:00 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 09:00 तक, फिर शुक्ल तृतीया 05:40 (23 मार्च) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 02:31 (24 मार्च) तक
- नक्षत्र
- रेवती 07:00 तक, फिर अश्विनी 04:25 (23 मार्च) तक, फिर भरणी 02:02 (24 मार्च) तक
- योग
- इन्द्र 21:18 तक, फिर वैधृति 17:29 (23 मार्च) तक
- करण
- कौलव 09:00 तक, फिर तैतिल 19:19 तक, फिर गर 05:40 (23 मार्च) तक, फिर वणिज 16:03 (23 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:41 – 14:12
- यमगंड08:08 – 09:39
- गुलिक काल11:10 – 12:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:37 – 08:08
- अमृत(शुभ)08:08 – 09:39
- काल(वर्जित (परंपरा))09:39 – 11:10
- शुभ(शुभ)11:10 – 12:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:14
- लाभ(शुभ)17:14 – 18:45
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
- शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:12
- चर(सामान्य)23:12 – 00:41 (23 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (23 मार्च) – 02:09 (23 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:09 (23 मार्च) – 03:38 (23 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:38 (23 मार्च) – 05:07 (23 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:07 (23 मार्च) – 06:36 (23 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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