पंचांग 20 अप्रैल 2034
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 अप्रैल 2034 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:14
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय07:31
चंद्रास्त20:40
- मास:
- वैशाख (अमांत)
- संवत:
- शक 1956 · विक्रम (चैत्रादि) 2091
- संवत्सर:
- आनंद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष 17:11 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 17:25 तक, फिर शुक्ल तृतीया 13:56 (21 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- भरणी 11:54 तक, फिर कृत्तिका 09:08 (21 अप्रैल) तक
- योग
- आयुष्मान 22:57 तक, फिर सौभाग्य 19:02 (21 अप्रैल) तक
- करण
- बालव 07:15 तक, फिर कौलव 17:25 तक, फिर तैतिल 03:38 (21 अप्रैल) तक, फिर गर 13:56 (21 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
- राहु काल14:08 – 15:43
- यमगंड06:14 – 07:49
- गुलिक काल09:24 – 10:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:14 – 07:49
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:49 – 09:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:58
- चर(सामान्य)10:58 – 12:33
- लाभ(शुभ)12:33 – 14:08
- अमृत(शुभ)14:08 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:18
- शुभ(शुभ)17:18 – 18:52
रात
- अमृत(शुभ)18:52 – 20:17
- चर(सामान्य)20:17 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:08
- काल(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (21 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)00:33 (21 अप्रैल) – 01:58 (21 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (21 अप्रैल) – 03:23 (21 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)03:23 (21 अप्रैल) – 04:48 (21 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)04:48 (21 अप्रैल) – 06:13 (21 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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