पंचांग 1 जुलाई 2035

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 जुलाई 2035 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय02:54 (2 जुल॰)
चंद्रास्त14:59
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
संवत्सर:
राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 08:36 तक, फिर कृष्ण एकादशी 05:56 (2 जुल॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 02:44 (3 जुल॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 06:07 तक, फिर भरणी 04:19 (2 जुल॰) तक, फिर कृत्तिका 01:58 (3 जुल॰) तक
योग
सुकर्मा 14:26 तक, फिर धृति 11:05 (2 जुल॰) तक
करण
विष्टि 08:36 तक, फिर बव 19:21 तक, फिर बालव 05:56 (2 जुल॰) तक, फिर कौलव 16:24 (2 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
  • राहु काल17:35 – 19:15
  • यमगंड12:38 – 14:17
  • गुलिक काल15:56 – 17:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:40
  • चर(सामान्य)07:40 – 09:20
  • लाभ(शुभ)09:20 – 10:59
  • अमृत(शुभ)10:59 – 12:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:17
  • शुभ(शुभ)14:17 – 15:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:15

रात

  • शुभ(शुभ)19:15 – 20:35
  • अमृत(शुभ)20:35 – 21:56
  • चर(सामान्य)21:56 – 23:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:38 (2 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (2 जुल॰) – 01:59 (2 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)01:59 (2 जुल॰) – 03:20 (2 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:20 (2 जुल॰) – 04:41 (2 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)04:41 (2 जुल॰) – 06:01 (2 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें